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बिहार की राजनीति में हलचल: अनंत सिंह और नीलम देवी को जेडीयू ने छह साल के लिए पार्टी से निकाला, विधान परिषद चुनाव पर टिकी नजरें

पटना, 25 अक्टूबर। बिहार की राजनीति में इन दिनों जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू), भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और जन सुराज पार्टी के बीच राजनीतिक गतिविधियां चर्चा में हैं। इसी बीच मोकामा के विधायक अनंत कुमार सिंह...

पटना, 25 अक्टूबर। बिहार की राजनीति में इन दिनों जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू), भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और जन सुराज पार्टी के बीच राजनीतिक गतिविधियां चर्चा में हैं। इसी बीच मोकामा के विधायक अनंत कुमार सिंह और पूर्व विधायक नीलम देवी को जेडीयू से छह साल के लिए निष्कासित किए जाने के बाद राज्य की राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है। पार्टी ने यह कार्रवाई कथित पार्टी-विरोधी गतिविधियों और विधान परिषद चुनाव में पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार के खिलाफ प्रचार करने के आरोप में की है। वहीं, बिहार विधान परिषद की आठ सीटों के लिए मतदान पूरा हो चुका है और अब 27 अक्टूबर को होने वाली मतगणना पर राजनीतिक दलों की नजरें टिकी हैं।

अनंत सिंह और नीलम देवी पर जेडीयू की कार्रवाई

जेडीयू ने 24 अक्टूबर को मोकामा के विधायक अनंत कुमार सिंह और पूर्व विधायक नीलम देवी को छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित करने की घोषणा की। पार्टी के बिहार प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा की ओर से जारी आदेश में अनंत सिंह पर पार्टी के निर्देशों की अवहेलना करने, वरिष्ठ नेताओं के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करने और विधान परिषद चुनाव में दूसरे दल के उम्मीदवार का समर्थन करने के आरोप लगाए गए हैं। नीलम देवी की प्राथमिक सदस्यता भी समाप्त कर दी गई है।

इस कार्रवाई का प्रमुख कारण पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में जेडीयू उम्मीदवार नीरज कुमार और जन सुराज पार्टी के उम्मीदवार अनुज सिंह के बीच चुनावी मुकाबले को बताया जा रहा है। अनंत सिंह ने पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार नीरज कुमार के बजाय जन सुराज के उम्मीदवार अनुज सिंह के समर्थन में प्रचार किया था। इस घटनाक्रम के बाद पार्टी नेतृत्व ने अनुशासनात्मक कार्रवाई की।

जेडीयू ने अनंत सिंह की विधानसभा सदस्यता समाप्त करने के लिए भी विधानसभा अध्यक्ष से अनुरोध करने की बात कही है। हालांकि, पार्टी से निष्कासन और विधानसभा की सदस्यता समाप्त होना दो अलग-अलग विषय हैं। विधायक की सदस्यता पर अंतिम निर्णय संबंधित संवैधानिक और कानूनी प्रक्रिया के अनुसार ही होगा।

इस घटनाक्रम ने जेडीयू के भीतर अनुशासन, स्थानीय राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता और पार्टी नेतृत्व के निर्देशों के पालन को लेकर चर्चा तेज कर दी है।

विधान परिषद की आठ सीटों पर चुनाव

बिहार विधान परिषद की चार स्नातक और चार शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों की सीटों के लिए 23 अक्टूबर को मतदान संपन्न हुआ। इन चुनावों में पटना, दरभंगा, तिरहुत और कोसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के साथ पटना, दरभंगा, तिरहुत और सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र शामिल हैं।

चुनाव आयोग के कार्यक्रम के अनुसार, इन आठ सीटों के लिए मतगणना और परिणाम की घोषणा 27 अक्टूबर को निर्धारित है। चुनाव में विभिन्न राजनीतिक दलों और निर्दलीय उम्मीदवारों ने अपनी किस्मत आजमाई है।

मतदान के बाद जारी प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार, स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में 43.87 प्रतिशत और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में 74.55 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में मतदाताओं की भागीदारी स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों की तुलना में अधिक रही।

इन चुनावों में जेडीयू और भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए), विपक्षी दलों तथा प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी की भूमिका पर राजनीतिक विश्लेषकों की नजर है। जन सुराज पार्टी के लिए यह चुनाव अपनी राजनीतिक उपस्थिति और संगठनात्मक क्षमता दिखाने का अवसर भी है।

जन सुराज पार्टी की भूमिका चर्चा में

प्रशांत किशोर के नेतृत्व वाली जन सुराज पार्टी बिहार की राजनीति में अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रही है। विधान परिषद की आठ सीटों पर उम्मीदवार उतारने से पार्टी को विभिन्न निर्वाचन क्षेत्रों में अपना समर्थन परखने का अवसर मिला है।

पटना स्नातक सीट पर अनुज सिंह के समर्थन में अनंत सिंह के प्रचार ने इस चुनाव को अतिरिक्त राजनीतिक महत्व दिया। हालांकि, चुनाव के वास्तविक परिणामों के आधार पर ही उम्मीदवारों के प्रदर्शन का आकलन किया जा सकेगा।

राज्य में जन सुराज की सक्रियता के बीच एनडीए और विपक्षी दलों के सामने अपने संगठन, मतदाता संपर्क और स्थानीय नेतृत्व की स्थिति को मजबूत बनाए रखने की चुनौती है।

एनडीए और विपक्ष के लिए क्या मायने रखता है चुनाव?

विधान परिषद चुनाव विधानसभा चुनाव से अलग प्रकृति के होते हैं। स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में निर्धारित पात्रता वाले स्नातक मतदाता और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में पात्र शिक्षक मतदाता मतदान करते हैं। इसलिए इन चुनावों के परिणामों को पूरे बिहार की जनता की राजनीतिक पसंद का सीधा प्रतिनिधि मानना उचित नहीं होगा।

इसके बावजूद, इन चुनावों में दलों की संगठनात्मक क्षमता, स्थानीय नेताओं का प्रभाव और गठबंधन के भीतर समन्वय की स्थिति सामने आती है। उम्मीदवारों की जीत और हार से संबंधित दलों की रणनीति पर चर्चा हो सकती है, लेकिन किसी एक चुनाव के आधार पर राज्य की व्यापक राजनीतिक तस्वीर का अंतिम निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।

जेडीयू के भीतर अनंत सिंह प्रकरण ने पार्टी अनुशासन का मुद्दा उठाया है। दूसरी ओर, जन सुराज की चुनावी भागीदारी ने मुकाबले में एक नया राजनीतिक पक्ष जोड़ा है। विपक्षी दल भी इन चुनावों के परिणामों के माध्यम से अपनी स्थिति का आकलन कर सकेंगे।

27 अक्टूबर के परिणाम पर टिकी नजरें

बिहार विधान परिषद की आठ सीटों की मतगणना 27 अक्टूबर को होनी है। ऐसे में राजनीतिक दलों, उम्मीदवारों और समर्थकों की नजरें परिणामों पर टिकी हैं। परिणाम आने के बाद यह स्पष्ट होगा कि किस निर्वाचन क्षेत्र में किस उम्मीदवार को मतदाताओं का समर्थन मिला।

अनंत सिंह और नीलम देवी के निष्कासन का राजनीतिक असर तथा जेडीयू के भीतर आगे की स्थिति भी आने वाले दिनों में चर्चा का विषय बनी रह सकती है। वहीं, विधानसभा सदस्यता को लेकर किसी भी संभावित निर्णय के लिए विधानसभा अध्यक्ष की प्रक्रिया और संबंधित कानूनी प्रावधान महत्वपूर्ण होंगे।

फिलहाल, बिहार की राजनीति में दो घटनाक्रम प्रमुख हैं—जेडीयू की अनुशासनात्मक कार्रवाई और विधान परिषद चुनाव की मतगणना। आगामी दिनों में चुनाव परिणाम तथा संबंधित राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं राज्य की राजनीतिक गतिविधियों को नई दिशा दे सकती हैं।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस, द न्यू इंडियन एक्सप्रेस, प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया (पीटीआई) और चुनाव संबंधी प्रकाशित रिपोर्टें।

MD JILLANI MANSURI

मो. जिलानी मंसूरी हिंदुस्तान तक न्यूज़ के चीफ एडिटर हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में लंबे समय से सक्रिय हैं। वे निष्पक्ष, तथ्यपरक और जनसरोकार से जुड़ी खबरों को प्राथमिकता देते हुए पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

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